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सत्य और धर्म की विजय का शाश्वत संदेश देता है विजयादशमी का पर्व : मुख्यमंत्री विष्णु देव साय

रायपुर, 20 अक्टूबर 2026 : मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि विजयादशमी का पर्व केवल बुराई पर अच्छाई की विजय का उत्सव नहीं, बल्कि सत्य, धर्म, न्याय और मानवता के मार्ग पर अडिग रहने का शाश्वत संदेश देने वाला महान सांस्कृतिक पर्व है। प्रभु श्रीराम का जीवन हमें सिखाता है कि सत्य का मार्ग कितना भी कठिन और चुनौतियों से भरा क्यों न हो, अंततः विजय सत्य और धर्म की ही होती है। जीवन में जब भी सही और गलत में से किसी एक पक्ष को चुनने का अवसर आए, हमें सदैव सत्य, न्याय और मानवता के पक्ष में खड़ा होना चाहिए, क्योंकि हम किसके साथ खड़े हैं, यही हमारे चरित्र और संस्कारों की वास्तविक पहचान है।
मुख्यमंत्री श्री साय आज राजधानी रायपुर के ऐतिहासिक डब्ल्यूआरएस मैदान में आयोजित विजयादशमी महोत्सव को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने हजारों लोगों की उपस्थिति और प्रभु श्रीराम के जयकारों के बीच धनुष-बाण से रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के विशाल पुतलों का दहन किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं देते हुए सभी के जीवन में सुख, शांति, समृद्धि और मंगल की कामना की।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि विजयादशमी हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सामाजिक समरसता और राष्ट्रीय एकता का प्रतीक है। यह पर्व हमें अपनी संस्कृति और परंपराओं से जोड़ने के साथ-साथ समाज में सद्भाव, नैतिकता और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रायपुर का डब्ल्यूआरएस मैदान पांच दशकों से अधिक समय से विजयादशमी उत्सव की गौरवशाली परंपरा का साक्षी रहा है। प्रतिवर्ष यहां रावण दहन के माध्यम से अधर्म पर धर्म और असत्य पर सत्य की विजय का संदेश जन-जन तक पहुंचता है। वर्षों से चली आ रही यह परंपरा केवल उत्सव नहीं, बल्कि हमारी सांस्कृतिक चेतना को जीवंत रखने और नई पीढ़ी को भारतीय जीवन मूल्यों से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी हमें यह स्मरण कराती है कि समाज और राष्ट्र की वास्तविक शक्ति सत्य, सदाचार, एकता और न्याय में निहित होती है। हमारी सांस्कृतिक परंपराओं में निहित यही मूल्य पीढ़ी-दर-पीढ़ी हमें सही मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देते रहे हैं।
प्रभु श्रीराम से छत्तीसगढ़ का गहरा और आत्मीय संबंध
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़वासियों के लिए विजयादशमी का पर्व विशेष महत्व रखता है, क्योंकि प्रभु श्रीराम का इस पावन धरती से अत्यंत गहरा और आत्मीय नाता है। छत्तीसगढ़ माता कौशल्या का मायका और प्रभु श्रीराम का ननिहाल माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार वनवास के दौरान प्रभु श्रीराम ने माता सीता और भ्राता लक्ष्मण के साथ छत्तीसगढ़ के वनांचलों में लंबा समय व्यतीत किया था। इसीलिए छत्तीसगढ़ की लोकआस्था, संस्कृति और जनजीवन में भगवान श्रीराम रचे-बसे हैं।
उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम का संपूर्ण जीवन त्याग, मर्यादा, धैर्य, साहस और धर्म के प्रति अटूट निष्ठा का अनुपम उदाहरण है। वनवास के दौरान अनेक कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना करने के बावजूद वे कभी अपने कर्तव्य और धर्म के मार्ग से विचलित नहीं हुए। उनका जीवन हमें विपरीत परिस्थितियों में भी धैर्य, मर्यादा और दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
शक्ति से बड़ी है सत्य और धर्म की सामर्थ्य
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रावण के पास अपार सैन्य शक्ति, अस्त्र-शस्त्र और महाबली योद्धाओं की विशाल सेना थी। दूसरी ओर प्रभु श्रीराम वनवासी जीवन व्यतीत कर रहे थे। उन्होंने वनवासियों और वानर सेना को संगठित कर रावण जैसी प्रबल शक्ति का सामना किया और विजय प्राप्त की। यह प्रसंग हमें बताता है कि संसाधनों और बाहुबल से कहीं अधिक बड़ी शक्ति सत्य, धर्म, दृढ़ संकल्प और सामूहिक पुरुषार्थ की होती है।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी हमें अपने जीवन में सही और गलत के बीच अंतर समझने तथा सत्य के पक्ष में दृढ़ता से खड़े होने का साहस देती है। प्रभु श्रीराम का संघर्ष केवल रावण के विरुद्ध युद्ध नहीं था, बल्कि अन्याय, अत्याचार और अधर्म के विरुद्ध धर्म एवं न्याय की स्थापना का संघर्ष था।
अधर्म का साथ देने वाला भी उसके परिणाम से नहीं बच सकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि रावण के साथ मेघनाद और कुंभकर्ण के पुतलों का दहन भी एक गहरा संदेश देता है। असत्य और अधर्म का साथ देने वाला व्यक्ति चाहे कितना ही शक्तिशाली क्यों न हो, अंततः उसे उसके परिणाम का सामना करना पड़ता है। इसलिए हमें जीवन के प्रत्येक अवसर पर सत्य, न्याय, करुणा और मानवता को सर्वोच्च स्थान देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के आदर्शों का वास्तविक अनुसरण केवल उनकी आराधना में नहीं, बल्कि उनके जीवन मूल्यों को अपने आचरण में उतारने में है। समाज में न्याय के पक्ष में खड़ा होना, कमजोर और जरूरतमंद का साथ देना तथा अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करना ही रामराज्य की मूल भावना है।
आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ इच्छाशक्ति का प्रतीक है ऑपरेशन सिंदूर
मुख्यमंत्री श्री साय ने विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आतंकवाद के विरुद्ध भारत की दृढ़ नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से देश ने राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता और दृढ़ इच्छाशक्ति का परिचय दिया है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि देश की सुरक्षा और नागरिकों के हितों से किसी भी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेश में स्थायी शांति, सुरक्षा और विकास स्थापित करने के संकल्प के साथ आगे बढ़ रही है। बस्तर सहित प्रदेश के प्रत्येक क्षेत्र में विश्वास, विकास और खुशहाली का वातावरण निर्मित करना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है। शांति और सुरक्षा के साथ विकास की रोशनी अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना ही सरकार का लक्ष्य है।
रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा करोड़ों भारतीयों के संकल्प और आस्था की सिद्धि
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि प्रभु श्रीराम का जीवन हमें संकल्प लेने और उसे पूर्ण करने की प्रेरणा देता है। अयोध्या में भव्य श्रीराम मंदिर का निर्माण करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, तप और लंबे संघर्ष से जुड़े संकल्प की पूर्ति का प्रतीक है।
उन्होंने कहा कि 22 जनवरी 2024 का दिन भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक इतिहास में सदैव स्वर्णाक्षरों में अंकित रहेगा। इस दिन अयोध्या में नवनिर्मित भव्य श्रीराम मंदिर में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा हुई। यह अवसर देश और दुनिया के करोड़ों रामभक्तों के लिए अत्यंत भावुक, गौरवपूर्ण और ऐतिहासिक क्षण था।
49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने किए श्रीरामलला के दर्शन
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रदेशवासियों की भगवान श्रीराम के प्रति अगाध श्रद्धा और धार्मिक आस्था को ध्यान में रखते हुए श्रीरामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना प्रारंभ की है। इस योजना के माध्यम से अब तक प्रदेश के 49 हजार से अधिक श्रद्धालुओं को अयोध्या धाम जाकर रामलला के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और भगवान श्रीराम से जुड़े धार्मिक स्थलों का इसमें विशिष्ट स्थान है। राज्य सरकार प्रदेश की संस्कृति, आस्था और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है।
प्रभु श्रीराम के आदर्शों पर चलकर समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण का आह्वान
मुख्यमंत्री श्री साय ने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की पुनः शुभकामनाएं देते हुए आह्वान किया कि हम सभी प्रभु श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में आत्मसात करें। सत्य, न्याय, सद्भाव, करुणा और मानवता के मार्ग पर चलते हुए अपने कर्तव्यों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करें तथा एक शांतिपूर्ण, समरस, सुरक्षित और समृद्ध छत्तीसगढ़ के निर्माण में अपनी सहभागिता निभाएं।
कार्यक्रम को राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा एवं रायपुर उत्तर विधायक श्री पुरंदर मिश्रा ने भी संबोधित किया। इस अवसर पर पूर्व विधायक श्री कुलदीप सिंह जुनेजा, श्री जयंती भाई पटेल, श्री सूर्यकांत राठौर, आयोजन समिति के प्रमुख श्री जी. स्वामी, नेशनल क्लब एवं आयोजन समिति के पदाधिकारीगण सहित बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।
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केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रावघाट – रायपुर एवं रायपुर – कुरूद यात्री रेल सेवाओं को दिखाई हरी झंडी

रायपुर, 20 अक्टूबर 2026 : छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार की दिशा में आज एक नया और ऐतिहासिक अध्याय जुड़ गया। केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव और मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने राजधानी रायपुर रेलवे स्टेशन से रावघाट – रायपुर एवं रायपुर – कुरूद नई यात्री रेल सेवाओं को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसी अवसर पर ताड़ोकी – रावघाट तथा अभनपुर – कुरूद रेलखंडों का लोकार्पण किया गया और रायपुर में आधुनिक इलेक्ट्रिक रेल इंजन मेंटेनेंस फैसिलिटी की आधारशिला रखी गई।
ताड़ोकी से रावघाट तक रेल लाइन का निर्माण पूरा होने के साथ आजादी के बाद पहली बार रावघाट रेल नेटवर्क से जुड़ गया है। बस्तर और दक्षिण छत्तीसगढ़ के दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों के लिए यह उपलब्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। नई रेल सेवाओं से इन क्षेत्रों का राजधानी रायपुर सहित प्रदेश के अन्य प्रमुख केंद्रों से संपर्क बेहतर होगा तथा आवागमन के साथ व्यापार, उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को नई गति मिलेगी।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेशवासियों को बधाई देते हुए कहा कि आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेल अधोसंरचना के विस्तार का अभूतपूर्व दौर चल रहा है। केंद्र और राज्य की डबल इंजन सरकार का प्रयास है कि आधुनिक रेल सुविधाओं का लाभ केवल बड़े शहरों तक सीमित न रहे, बल्कि बस्तर और सरगुजा सहित प्रदेश के दूरस्थ एवं जनजातीय अंचलों तक पहुँचे।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि रावघाट तक पहली बार रेल पहुँचना केवल एक रेल परियोजना की पूर्णता नहीं, बल्कि बस्तर के विकास की नई संभावनाओं का द्वार खुलना है। रेल जहाँ पहुँचती है, वहाँ विकास की गति बढ़ती है। इससे लोगों का आवागमन आसान होता है, बाजारों तक पहुँच बढ़ती है, उद्योगों और निवेश को प्रोत्साहन मिलता है तथा युवाओं के लिए रोजगार और आजीविका के नए अवसर निर्मित होते हैं।
उन्होंने कहा कि विजयादशमी के पावन अवसर पर प्रदेश को मिली यह सौगात छत्तीसगढ़ के लिए विशेष प्रसन्नता और गौरव का विषय है। रावघाट – रायपुर और रायपुर – कुरूद रेल सेवाएँ प्रदेश की कनेक्टिविटी को सुदृढ़ करने के साथ विकास के नए द्वार खोलेंगी।
प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में रेल अधोसंरचना में ऐतिहासिक निवेश
केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में छत्तीसगढ़ में रेलवे के विकास के लिए बड़े पैमाने पर कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में प्रदेश में लगभग 54 हजार करोड़ रुपए की रेल विकास परियोजनाओं पर काम चल रहा है। इस वर्ष रेलवे द्वारा छत्तीसगढ़ के लिए 7,470 करोड़ रुपए का बजट आवंटित किया गया है।
उन्होंने कहा कि रावघाट तक रेल संपर्क स्थापित होना और रावघाट – रायपुर तथा रायपुर – कुरूद यात्री रेल सेवाओं की शुरुआत इसी व्यापक विकास यात्रा की महत्वपूर्ण कड़ी है। आने वाले समय में रावघाट से जगदलपुर तक रेल संपर्क विकसित करने की दिशा में भी कार्य किया जा रहा है। इसके साथ ही रावघाट – जगदलपुर – कोरापुट – विशाखापत्तनम रेल संपर्क के विस्तार की दिशा में भी प्रयास किए जा रहे हैं। इससे बस्तर सहित दक्षिण छत्तीसगढ़ की देश के प्रमुख रेल नेटवर्क और आर्थिक केंद्रों से कनेक्टिविटी और सुदृढ़ होगी।
आजादी के बाद पहली बार रावघाट तक पहुँची रेल
दल्लीराजहरा – रावघाट रेल परियोजना छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण रेल परियोजनाओं में से एक है। लगभग 1,628 करोड़ रुपए की लागत वाली इस परियोजना की कुल लंबाई लगभग 95 किलोमीटर है। ताड़ोकी से रावघाट के बीच 17.5 किलोमीटर रेल लाइन का कार्य पूरा होने के साथ रावघाट तक रेल संपर्क स्थापित हो गया है।
आजादी के बाद पहली बार रावघाट तक रेल पहुँचना बस्तर अंचल के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है। इस रेल संपर्क के माध्यम से दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों को राजधानी एवं अन्य प्रमुख केंद्रों से जोड़ने का मार्ग और सुदृढ़ हुआ है। इससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर यातायात सुविधा मिलने के साथ क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों, पर्यटन, व्यापार एवं औद्योगिक विकास को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
रायपुर – कुरूद रेल सेवा से धमतरी तक ब्रॉडगेज कनेक्टिविटी की दिशा में बड़ा कदम
अभनपुर – धमतरी गेज परिवर्तन परियोजना के अंतर्गत अभनपुर से कुरूद तक लगभग 22 किलोमीटर रेल लाइन का गेज परिवर्तन पूरा किया गया है। इसके साथ रायपुर से कुरूद के बीच नई यात्री रेल सेवा प्रारंभ होने से इस क्षेत्र की रेल कनेक्टिविटी को नई मजबूती मिली है।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि पहले रायपुर और धमतरी के बीच नैरो गेज रेल सेवा संचालित होती थी। अब इस रेलमार्ग को ब्रॉडगेज में परिवर्तित किए जाने से यात्रियों को आधुनिक और बेहतर रेल सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। कुरूद से धमतरी तक शेष कार्य पूरा होने के बाद रायपुर से धमतरी तक रेल सेवा के विस्तार का मार्ग और प्रशस्त होगा।
2014 के बाद छत्तीसगढ़ में बिछाई गईं 1,328 किलोमीटर नई रेल पटरियाँ
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि वर्ष 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनने के बाद छत्तीसगढ़ में रेलवे के विकास की तस्वीर तेजी से बदली है। उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार के समय छत्तीसगढ़ को रेलवे विकास के लिए प्रतिवर्ष लगभग 300 करोड़ रुपए का बजट मिलता था, जबकि आज यह बढ़कर सात हजार करोड़ रुपए से अधिक हो गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2014 से पहले प्रदेश में लगभग 32 किलोमीटर नई रेल लाइन का विस्तार हुआ था, जबकि वर्ष 2014 के बाद छत्तीसगढ़ में लगभग 1,328 किलोमीटर नई रेल पटरियाँ बिछाई गई हैं। यह परिवर्तन बताता है कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ के रेल विकास को कितनी बड़ी प्राथमिकता मिली है।
उन्होंने कहा कि रेल बजट में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ नई रेल लाइन, दोहरीकरण, विद्युतीकरण, स्टेशनों के आधुनिकीकरण और यात्री सुविधाओं के विस्तार पर तेजी से काम हो रहा है।
32 रेलवे स्टेशनों का हो रहा विश्वस्तरीय विकास
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 32 रेलवे स्टेशनों को आधुनिक और विश्वस्तरीय सुविधाओं से विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। इनमें से आठ रेलवे स्टेशन विकसित होकर तैयार हो चुके हैं। इन स्टेशनों में यात्रियों के लिए आधुनिक सुविधाओं, बेहतर परिसर और सुविधाजनक वातावरण के विकास पर विशेष जोर दिया गया है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक रेलवे स्टेशन केवल यात्री सुविधाओं का विस्तार नहीं हैं, बल्कि ये संबंधित शहरों में आर्थिक गतिविधियों, व्यापार, पर्यटन और रोजगार को भी बढ़ावा देते हैं। प्रदेश में विकसित हो रही नई रेल अधोसंरचना आने वाले वर्षों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर तैयार की जा रही है।
रायपुर में बनेगी आधुनिक इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव मेंटेनेंस फैसिलिटी
कार्यक्रम के दौरान रायपुर में आधुनिक इलेक्ट्रिक रेल इंजन मेंटेनेंस फैसिलिटी की आधारशिला भी रखी गई। इस अत्याधुनिक सुविधा के विकसित होने पर भविष्य में 300 हाई हॉर्सपावर इलेक्ट्रिक रेल इंजनों के रखरखाव की क्षमता विकसित होगी।
इस सुविधा से रेल इंजनों के रखरखाव की व्यवस्था और बेहतर होगी, रेल परिचालन क्षमता बढ़ेगी तथा माल परिवहन की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता मिलेगी। यह परियोजना छत्तीसगढ़ को रेलवे की आधुनिक तकनीकी एवं मेंटेनेंस अधोसंरचना के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में भी अहम कदम साबित होगी।
नई रेल परियोजनाओं से दूरस्थ अंचलों तक पहुँचेगा विकास
मुख्यमंत्री श्री साय ने छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क के विस्तार और नई परियोजनाओं की स्वीकृति के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी तथा केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने खरसिया – परमालकसा, रावघाट – जगदलपुर तथा डोंगरगढ़ – कटघोरा सहित विभिन्न रेल परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि इन परियोजनाओं से प्रदेश के अनेक क्षेत्रों में रेल संपर्क और मजबूत होगा।
मुख्यमंत्री ने जशपुर जिले के पत्थलगांव से लोहरदगा क्षेत्र की ओर रेल संपर्क विस्तार की मांग को विशेष पैकेज में शामिल किए जाने के लिए भी केंद्रीय रेल मंत्री के प्रति धन्यवाद ज्ञापित किया।
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ भौगोलिक दृष्टि से विशाल प्रदेश है और यहां बड़ी जनसंख्या दूरस्थ, वनांचल एवं जनजातीय क्षेत्रों में निवास करती है। ऐसे क्षेत्रों तक रेल नेटवर्क का विस्तार नागरिकों के जीवन में बड़ा परिवर्तन लाने वाला है। रेल संपर्क बढ़ने से विद्यार्थियों को शिक्षा, मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं, किसानों और उत्पादकों को बड़े बाजारों तथा युवाओं को रोजगार के अवसरों तक पहुँचने में आसानी होगी।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य विकास के लाभ को समाज की अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति तक पहुँचाना है और आधुनिक परिवहन अधोसंरचना इस संकल्प को साकार करने का महत्वपूर्ण माध्यम है।
बस्तर के विकास की नई संभावनाओं का द्वार
मुख्यमंत्री श्री साय ने कहा कि बस्तर आज शांति, विश्वास और विकास की नई यात्रा पर तेजी से आगे बढ़ रहा है। क्षेत्र में सड़क, रेल, बिजली, दूरसंचार और अन्य बुनियादी अधोसंरचनाओं का निरंतर विस्तार किया जा रहा है। रावघाट तक रेल का पहुँचना इस परिवर्तनकारी यात्रा को और गति देगा।
उन्होंने कहा कि बेहतर रेल संपर्क से बस्तर की प्राकृतिक और सांस्कृतिक संपदा को देश-दुनिया तक नई पहचान मिलेगी। स्थानीय उत्पादों को बड़े बाजारों तक पहुँचाने में सुविधा होगी और पर्यटन, व्यापार तथा औद्योगिक गतिविधियों के लिए नई संभावनाएँ विकसित होंगी।
विजयादशमी पर छत्तीसगढ़ को मिली विकास की बड़ी सौगात
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेशवासियों को विजयादशमी की शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि विजयादशमी सत्य की असत्य पर और धर्म की अधर्म पर विजय का पावन पर्व है। ऐसे शुभ अवसर पर छत्तीसगढ़ को नई रेल सेवाओं और आधुनिक रेल अधोसंरचना की सौगात मिलना हम सभी के लिए आनंद और गौरव का विषय है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव के प्रयासों से छत्तीसगढ़ के रेल नेटवर्क का निरंतर विस्तार हो रहा है। डबल इंजन सरकार प्रदेश के हर क्षेत्र को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने के संकल्प के साथ कार्य कर रही है।
उन्होंने कहा कि रावघाट तक पहुँची रेल विकास की नई यात्रा की शुरुआत है। आने वाले समय में प्रदेश के और अधिक दूरस्थ क्षेत्रों को आधुनिक रेल नेटवर्क से जोड़कर छत्तीसगढ़ को बेहतर कनेक्टिविटी, मजबूत अर्थव्यवस्था और व्यापक अवसरों वाला विकसित राज्य बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ाया जाएगा।
कार्यक्रम में रायपुर सांसद श्री बृजमोहन अग्रवाल, महासमुंद सांसद श्रीमती रूपकुमारी चौधरी, राज्यसभा सांसद श्रीमती लक्ष्मी वर्मा, कांकेर सांसद श्री भोजराज नाग, विधायक श्री राजेश मूणत, श्री मोतीलाल साहू, श्री पुरंदर मिश्रा, पूर्व सांसद एवं विधायक श्री विक्रम उसेंडी, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के महाप्रबंधक श्री तरुण प्रकाश, मंडल रेल प्रबंधक श्री दयानंद सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और जनप्रतिनिधिगण नागरिक उपस्थित थे।
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महाअष्टमी पर उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने किए मां दंतेश्वरी, मां परमेश्वरी और मां चंडी के दर्शन

रायपुर, 20 अक्टूबर 2026 : नवरात्रि की महाअष्टमी पर उप मुख्यमंत्री एवं कवर्धा विधायक श्री विजय शर्मा ने कबीरधाम जिले के कवर्धा नगर स्थित प्रसिद्ध मां दंतेश्वरी मंदिर, मां परमेश्वरी मंदिर एवं मां चंडी मंदिर पहुंचकर पूजा-अर्चना की और प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर उन्होंने कवर्धा की ऐतिहासिक धार्मिक परंपरा के अंतर्गत रात्रि में निकलने वाली माता काली की खप्पर यात्रा के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त किया। इस दौरान वे श्रद्धालुओं के साथ माता सेवा में शामिल हुए और जसगीत गाकर मां भगवती की आराधना की।
कवर्धा में महाअष्टमी की रात्रि में खप्पर निकालने की परंपरा सौ वर्षों से भी अधिक पुरानी मानी जाती है। मां दंतेश्वरी, मां चंडी और मां परमेश्वरी मंदिरों से जुड़ी यह अनूठी परंपरा क्षेत्र की धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता काली के स्वरूप में खप्पर धारण कर नगर भ्रमण की यह परंपरा नगर की सुख-शांति, सुरक्षा और लोक कल्याण की कामना के साथ निभाई जाती है। माता के जयकारों और भक्तिमय वातावरण के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस विशेष अनुष्ठान के दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने खप्पर वाली माता के श्रद्धापूर्वक दर्शन किए और इस प्राचीन परंपरा के प्रति अपनी आस्था व्यक्त की। इस दौरान उन्होंने कवर्धा सहित दूर-दराज के क्षेत्रों से दर्शन के लिए पहुंचे युवाओं और श्रद्धालुओं से आत्मीय मुलाकात की। माता सेवा में शामिल होकर उन्होंने सभी के साथ जसगीत गाए। भक्ति गीतों और माता के जयकारों से वातावरण भक्तिमय हो उठा। उन्होंने सभी को नवरात्रि की शुभकामनाएं देते हुए उनका हालचाल जाना।
उप मुख्यमंत्री श्री शर्मा ने कहा कि कवर्धा की खप्पर यात्रा हमारी प्राचीन धार्मिक परंपराओं और लोक आस्था की अनमोल धरोहर है। पीढ़ियों से चली आ रही यह परंपरा आज भी लोगों को अपनी संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़े हुए है। उन्होंने कहा कि महाअष्टमी के पावन अवसर पर माता के दर्शन और श्रद्धालुओं के साथ सेवा एवं आराधना में शामिल होना सौभाग्य की बात है। उन्होंने मां भगवती से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
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महानवमी पर वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने रायगढ़ के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में की माँ दुर्गा की पूजा-अर्चना

रायपुर, 20 अक्टूबर 2026 : शारदीय नवरात्रि की महानवमी के पावन अवसर पर प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी ने आज रायगढ़ शहर के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों में पहुंचकर माँ दुर्गा की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। उन्होंने माँ भगवती के चरणों में शीश नवाकर समस्त प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि, उत्तम स्वास्थ्य और खुशहाल जीवन की मंगलकामना की। इस अवसर पर उन्होंने श्रद्धालुओं से मुलाकात कर महानवमी पर्व की शुभकामनाएं भी दीं।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने माँ दुर्गा की महिमा का स्मरण करते हुए कहा कि नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति, भक्ति, साधना और सकारात्मक ऊर्जा का प्रतीक है। माँ भगवती की आराधना हमें जीवन में साहस, सद्भाव, सेवा और लोककल्याण के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। हमारी सनातन संस्कृति में आदिशक्ति माँ दुर्गा की उपासना का विशेष महत्व है। यह पर्व हमारी समृद्ध धार्मिक परंपराओं, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता को सशक्त बनाता है।
उन्होंने कहा कि रायगढ़ सहित पूरे छत्तीसगढ़ में नवरात्रि के दौरान श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का अद्भुत वातावरण देखने को मिलता है। दुर्गा पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की आस्था और सामूहिक सहभागिता हमारी गौरवशाली सांस्कृतिक परंपराओं को जीवंत बनाए रखती है।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने माँ भगवती से प्रार्थना की कि उनकी असीम कृपा और आशीर्वाद समस्त प्रदेशवासियों पर सदैव बना रहे। छत्तीसगढ़ में सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली का निरंतर विस्तार हो तथा प्रदेश विकास और प्रगति के पथ पर आगे बढ़ता रहे।
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गौ सेवा ही सबसे बड़ी सेवा: वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी

रायपुर, 20 अक्टूबर 2026 : गौ सेवा हमारी सनातन संस्कृति, परंपराओं और जीवन मूल्यों का अभिन्न अंग है। गौवंश का संरक्षण एवं संवर्धन केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी भी है। प्रदेश के वित्त मंत्री एवं रायगढ़ विधायक श्री ओ.पी. चौधरी ने विजयादशमी के पावन अवसर पर रायगढ़ में चक्रधर गौशाला ट्रस्ट द्वारा नवनिर्मित गौ चिकित्सालय का शुभारंभ करते हुए यह बात कही।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने गौ चिकित्सालय के शुभारंभ पर चक्रधर गौशाला ट्रस्ट के सेवाभावी प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि गौ सेवा ही सबसे बड़ी सेवा है। हमारी सनातन परंपरा में गौ माता को विशेष स्थान प्राप्त है। गौवंश की सेवा, संरक्षण और उनके स्वास्थ्य की देखभाल के लिए किए जाने वाले ऐसे प्रयास समाज में सेवा, संवेदना और करुणा की भावना को मजबूत करते हैं।
उन्होंने कहा कि चक्रधर गौशाला ट्रस्ट द्वारा स्थापित यह गौ चिकित्सालय गौवंश के उपचार और देखभाल की दिशा में एक सराहनीय पहल है। इससे बीमार एवं जरूरतमंद गौवंश को बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
वित्त मंत्री श्री चौधरी ने कहा कि सेवा के ऐसे छोटे-छोटे प्रयास ही हमारी सनातन परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं। गौ सेवा के प्रति समाज की सहभागिता और समर्पण भाव हमारी सांस्कृतिक विरासत को और अधिक सशक्त बनाते हैं। उन्होंने इस पुनीत कार्य से जुड़े सभी गौ सेवकों एवं ट्रस्ट के सदस्यों को शुभकामनाएं दीं।
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छत्तीसगढ़ की कला प्रतिभाओं ने राष्ट्रीय मंच पर लहराया परचम, केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने जशपुर के डॉ. आनन्द पाण्डेय और सारंगढ़ के घनश्याम साहू को किया सम्मानित

रायपुर, 20 अक्टूबर 2026 : छत्तीसगढ़ की समृद्ध कला, संस्कृति और रंगमंचीय परंपरा के लिए यह अत्यंत गौरवशाली उपलब्धि है। संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने मेघदूत थिएटर परिसर, रविन्द्र भवन, नई दिल्ली में 19 अक्टूबर 2026 को आयोजित समारोह में प्रदेश के दो प्रतिभाशाली कलाकार प्रसिद्ध रंगमंच में योगदान के लिए जशपुर के डॉ. आनन्द पाण्डेय एवं विशिष्ट नाट्य लेखन एवं छत्तीसगढ़ी फिल्मों में प्रभावशाली पटकथा लेखन के लिए सारंगढ़ के श्री घनश्याम साहू को संगीत नाटक अकादमी के प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया।
उल्लेखनीय है कि सुदूर आदिवासी अंचल जशपुर में रंगमंच की अलख जगाने वाले डॉ. आनन्द पाण्डेय को उत्कृष्ट अभिनय तथा सारंगढ़ के श्री घनश्याम साहू को विशिष्ट नाट्य लेखन एवं छत्तीसगढ़ी फिल्मों में प्रभावशाली पटकथा लेखन के लिए यह राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। दोनों कलाकारों की इस उपलब्धि ने छत्तीसगढ़ की रचनात्मक प्रतिभा, सांस्कृतिक समृद्धि और नाट्य परंपरा को राष्ट्रीय स्तर पर गौरवान्वित किया है।
छत्तीसगढ़ के वनांचलों और छोटे कस्बों से निकलकर राष्ट्रीय स्तर पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाले इन कलाकारों की सफलता इस बात का प्रमाण है कि प्रतिभा और सृजनशीलता किसी भौगोलिक सीमा की मोहताज नहीं होती। कला के प्रति समर्पण, निरंतर साधना और रचनात्मक प्रतिबद्धता के बल पर प्रदेश के कलाकार राष्ट्रीय सांस्कृतिक परिदृश्य में अपनी प्रभावशाली उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं।
जशपुर के डॉ. आनन्द पाण्डेय ने रंगमंच को दी नई पहचान
छत्तीसगढ़ के सुदूर आदिवासी अंचल जशपुर में रंगमंच की परंपरा को आगे बढ़ाने और अभिनय के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करने वाले डॉ. आनन्द पाण्डेय को उत्कृष्ट अभिनय के लिए प्रतिष्ठित उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उनकी यह उपलब्धि जशपुर सहित पूरे सरगुजा अंचल और छत्तीसगढ़ के रंगमंच से जुड़े कलाकारों के लिए प्रेरणादायी है।
डॉ. पाण्डेय की कला साधना इस बात का उदाहरण है कि सीमित संसाधनों और दूरस्थ क्षेत्रों में रहकर भी प्रतिभा, परिश्रम और समर्पण के माध्यम से राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है। उनका सम्मान छत्तीसगढ़ के आदिवासी अंचलों में विद्यमान रचनात्मक संभावनाओं और सांस्कृतिक प्रतिभाओं को नई प्रेरणा प्रदान करने वाला है।
सारंगढ़ के श्री घनश्याम साहू ने नाट्य लेखन और छत्तीसगढ़ी सिनेमा को दिलाया गौरव
सारंगढ़ के प्रतिभाशाली लेखक श्री घनश्याम साहू को उनके विशिष्ट नाट्य लेखन और छत्तीसगढ़ी फिल्मों में उत्कृष्ट पटकथा लेखन के लिए राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। उनकी यह उपलब्धि प्रदेश की साहित्यिक, नाट्य और सिनेमाई रचनात्मकता के लिए महत्वपूर्ण है।
नाट्य लेखन और पटकथा लेखन किसी भी रंगमंचीय प्रस्तुति अथवा फिल्म की आत्मा होते हैं। प्रभावशाली कथानक, संवेदनशील संवाद और सामाजिक जीवन से जुड़े विषयों को रचनात्मक अभिव्यक्ति प्रदान करने में लेखकों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। श्री साहू को मिला यह सम्मान छत्तीसगढ़ी भाषा, साहित्य और सिनेमा के क्षेत्र में कार्यरत रचनाकारों के लिए उत्साहवर्धक है।
छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक प्रतिभाओं के लिए प्रेरणा बना राष्ट्रीय सम्मान
संगीत नाटक अकादमी का उस्ताद बिस्मिल्लाह खान युवा पुरस्कार भारतीय प्रदर्शन कलाओं के क्षेत्र में युवा प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने वाला प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान है। छत्तीसगढ़ के दो कलाकारों को यह सम्मान प्राप्त होना प्रदेश की जीवंत नाट्य परंपरा और रचनात्मक क्षमता का परिचायक है।
लोककला, लोकनाट्य, संगीत, नृत्य, साहित्य और रंगमंच की समृद्ध विरासत वाला छत्तीसगढ़ अपनी विशिष्ट सांस्कृतिक पहचान के लिए जाना जाता है। यहां की लोक परंपराएं, जनजीवन, बोलियां और सामाजिक संवेदनाएं कलाकारों को सृजन की व्यापक संभावनाएं प्रदान करती हैं। ऐसे में प्रदेश के कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर पर मिलने वाली पहचान नई पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करती है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने दी हार्दिक बधाई
प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री राजेश अग्रवाल ने डॉ. आनन्द पाण्डेय और श्री घनश्याम साहू को प्रतिष्ठित राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त होने पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी हैं।
मंत्री श्री अग्रवाल ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती कला, संस्कृति और सृजनशीलता की अनमोल विरासत से समृद्ध है। प्रदेश के सुदूर वनांचलों और छोटे कस्बों से निकलकर कलाकारों का राष्ट्रीय मंच पर सम्मानित होना पूरे छत्तीसगढ़ के लिए गर्व और गौरव का विषय है।
उन्होंने कहा कि डॉ. आनन्द पाण्डेय और श्री घनश्याम साहू की उपलब्धि प्रदेश की युवा पीढ़ी, रंगकर्मियों, साहित्यकारों और सिनेमा से जुड़े रचनाकारों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। दोनों कलाकारों ने अपनी प्रतिभा और कला साधना से यह सिद्ध किया है कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की अपार संभावनाएं हैं।
मंत्री श्री अग्रवाल ने दोनों कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि प्रदेश के कलाकारों की ऐसी उपलब्धियां छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाती हैं तथा आने वाली पीढ़ियों को कला और संस्कृति के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए प्रेरित करती हैं।
छत्तीसगढ़ के इन दोनों कलाकारों को प्राप्त राष्ट्रीय सम्मान केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं, बल्कि प्रदेश की सामूहिक सांस्कृतिक चेतना, कला साधना और रचनात्मक प्रतिभा का सम्मान है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय पटल पर नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
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उत्तर बस्तर कांकेर : आजादी के बाद पहली बार रावघाट तक पहुंची रेल, बस्तर के विकास को मिली नई रफ्तार

उत्तर बस्तर कांकेर, 20 अक्टूबर 2026 :छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल में विकास और बेहतर कनेक्टिविटी की दिशा में आज एक ऐतिहासिक उपलब्धि जुड़ गई। दल्लीराजहरा-रावघाट रेल लाइन परियोजना के अंतर्गत ताड़ोकी से रावघाट के बीच नवनिर्मित 17.5 किलोमीटर रेलखंड का उद्घाटन किया गया। इसके साथ रावघाट से छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर तक रेलवे की सुविधा उपलब्ध हो गई हैं। आजादी के बाद पहली बार रावघाट तक रेल पहुंचने से क्षेत्र के लोगों का वर्षों पुराना सपना साकार हुआ है। यह उपलब्धि केवल रेल लाइन के विस्तार तक सीमित नहीं है, बल्कि बस्तर के दूरस्थ गांवों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने रायपुर से तथा केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हरी झंडी दिखाकर रेल सेवा का शुभारंभ किया। वहीं सांसद श्री भोजराज नाग एवं विधायक श्री विक्रम देव उसेंडी ने भी रावघाट रेलवे स्टेशन से रावघाट – रायपुर मेमो पैसेंजर को हरी झंडी दिखाकर रायपुर के लिए रवाना किया। इस ऐतिहासिक अवसर पर क्षेत्र के ग्रामीणों में विशेष उत्साह देखने को मिला। सांसद एवं विधायक ने ग्रामीणों के साथ रावघाट से अंतागढ़ तक रेल यात्रा भी की। यात्रियों को इस अवसर पर निःशुल्क डेमो टिकट कार्ड प्रदान किए गए।
ग्रामीण बच्चों के सपनों को मिलेगी नई उड़ान
रावघाट तक रेल पहुंचने से अब दूरस्थ अंचलों के विद्यार्थियों के लिए शहरों में जाकर पढ़ाई करना पहले की तुलना में आसान होगा। बेहतर आवागमन सुविधा मिलने से बच्चों को उच्च शिक्षा के अवसरों तक पहुंचने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही ग्रामीणों को इलाज के लिए बड़े अस्पतालों तक पहुंचने, जरूरी सामान खरीदने, रोजगार के अवसर तलाशने और व्यापारिक गतिविधियों में भागीदारी बढ़ाने में भी सुविधा होगी।
अब तक दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों और सीमित परिवहन सुविधाओं के कारण क्षेत्र के लोगों को आवागमन में कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। रेल सेवा शुरू होने से समय और यात्रा खर्च में राहत मिलेगी। यह सुविधा विशेष रूप से विद्यार्थियों, मरीजों, श्रमिकों, किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए लाभकारी साबित होगी।1,628 करोड़ की परियोजना से बढ़ेगा रेल नेटवर्क
दल्लीराजहरा-रावघाट के बीच लगभग ₹1,628 करोड़ की लागत से 95 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन परियोजना अंतर्गत ताड़ोकी से रावघाट के बीच 17.5 किलोमीटर रेलखंड का निर्माण पूरा हुआ है। इस रेल संपर्क से बस्तर के सुदूर क्षेत्रों में परिवहन सुविधाओं का विस्तार होगा और स्थानीय आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की संभावनाएं मजबूत होंगी।
रावघाट से रायपुर के लिए मेमो पैसेंजर ट्रेन संख्या 68769 का परिचालन प्रातः 6:30 बजे रावघाट से प्रस्तावित समय-सारणी के अनुसार होगा। इस ट्रेन का सामान्य किराया रायपुर तक ₹55 बताया गया है। इससे क्षेत्र के यात्रियों को राजधानी रायपुर सहित मार्ग में आने वाले प्रमुख स्थानों तक पहुंचने का सुलभ विकल्प मिलेगा।विकास की मुख्यधारा से जुड़ रहा बस्तर
बस्तर अंचल में रेल सेवा का विस्तार क्षेत्र के सामाजिक और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है। सांसद श्री भोजराज नाग ने इस अवसर को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि बस्तरवासी आजादी के बाद से रेल सुविधा की प्रतीक्षा कर रहे थे। दुर्गम क्षेत्र में रेल लाइन का विस्तार करना एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के निरंतर प्रयासों से यह सपना साकार होने की दिशा में आगे बढ़ा है।
नक्सलवाद के समाप्ति एवं क्षेत्र में विकास के वातावरण के बीच ऐसी आधारभूत सुविधाओं का विस्तार बस्तर के लिए नई संभावनाएं खोल रहा है। रेल संपर्क से स्थानीय लोगों का देश के अन्य हिस्सों से जुड़ाव बढ़ेगा तथा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और व्यापार के नए रास्ते खुलेंगे।
रावघाट तक रेल पहुंचना इस बात का प्रतीक है कि बस्तर का दूरस्थ अंचल भी अब विकास की नई यात्रा में आगे बढ़ रहा है। रेल की सीटी के साथ यहां के बच्चों के बेहतर भविष्य, मरीजों की आसान यात्रा, युवाओं के रोजगार और स्थानीय व्यापार की नई उम्मीदों ने भी गति पकड़ी है।रावघाट से रायपुर मेमो पैसेंजर ट्रैन के शुभारम्भ अवसर पर प्रधान मुख्ययांत्रिकी इंजीनियर श्री मनीष अग्रवाल, मुख्य महाप्रबंधक रावघाट श्री अनूप बिष्ट, ई डी रावघाट अरुण कुमार, श्री भावेश पाण्डे, जिला पंचायत के मुख्य कार्यापालन अधिकारी श्री हरेश मंडावी, जनपद अध्यक्ष अंतागढ़ श्रीमती मनोरमा मंडावी,नगर पंचायात अध्यक्ष अंतागढ़ श्री राधेलाल नाग, लधु वनोपज संघ के अध्यक्ष श्री रुपसाय सलाम, ग्राम पंचायत रावघाट के सरपंच प्यारेलाल उसेंडी, अंतागढ़ अपर कलेक्टर व एसडीएम श्री गंगाधर वाहिले सहित कांकेर एवं नारायणपुर जिले के पंच सरपंच एवं बड़ी संख्या में ग्रामीण जन और जिला प्रशासन व रेलवे के अधिकारी मौजूद रहें
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मध्यप्रदेश खाद्य प्रसंस्करण और सोया उद्योग के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा आगे : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल :मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि मध्यप्रदेश सरकार कृषि, उद्योग, खाद्य प्रसंस्करण, एमएसएमई, खनन, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित सभी प्रमुख क्षेत्रों में विकास को गति देने के लिए निरंतर कार्य कर रही है। प्रदेश में निवेश को प्रोत्साहित करने और उद्योगों के विस्तार के लिए निवेशकों के साथ लगातार संवाद एवं कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। मध्यप्रदेश को देश की फूड बास्केट के रूप में पहचान प्राप्त है। सोयाबीन उत्पादन में भी प्रदेश की महत्वपूर्ण भूमिका है। मालवा सोयाबीन की राजधानी है। देश में सोयाबीन के कुल उत्पादन का 45 फीसदी उत्पादन मध्यप्रदेश में होता है।
सोयाबीन क्षेत्र से जुड़े राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय विशेषज्ञों, उद्यमियों और किसानों का इंदौर में एकत्रित होना प्रदेश के लिए गौरव का विषय है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव शुक्रवार को इंदौर के ब्रिलियंट कन्वेंशन सेंटर में आयोजित दो दिवसीय 9वें अंतर्राष्ट्रीय सोया कॉन्क्लेव को सम्बोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने सोयाबीन की मैन्युफैक्चरिंग, निर्यात, प्रोसेसिंग, उपभोक्ता बिक्री और रिफाइंड ऑयल के विपणन सहित विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कंपनियों के लगभग 15 उद्योगपतियों और उनके प्रतिनिधियों को अवार्ड देकर सम्मानित किया गया। सोपा के चेयरमैन श्री गोयनका ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को शॉल एवं श्रीफल भेंट कर सम्मानित किया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत सभी क्षेत्रों में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री श्री मोदी के सुशासन और जनकल्याण के संकल्प को आगे बढ़ाते हुए गरीबों, महिलाओं, युवाओं और किसानों के कल्याण के लिए निरंतर कार्य किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री मोदी के नेतृत्व में देश ने विकास के नए आयाम स्थापित किए हैं। प्रदेश सरकार कृषक कल्याण वर्ष मना रही है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश सोयाबीन उत्पादन और कृषि आधारित उद्योगों की दृष्टि से महत्वपूर्ण राज्य है। सोयाबीन क्षेत्र में कार्य करने वाले उद्यमियों एवं संस्थानों को सम्मानित करना उनके उत्कृष्ट योगदान का अभिनंदन है। प्रतिकूल मौसमी परिस्थितियों और अल नीनो के प्रभाव जैसी चुनौतियों के बावजूद प्रदेश के किसानों ने सोयाबीन उत्पादन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया है। प्रदेश में चुनौतियों को अवसर में बदलने की क्षमता है। राज्य सरकार किसानों की आय बढ़ाने, कृषि उत्पादकता में सुधार लाने और कृषि आधारित उद्योगों को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में उद्योगों के विकास के लिए अनुकूल वातावरण उपलब्ध है। सस्ती बिजली, भूमि और जल की उपलब्धता सहित अन्य आवश्यक सुविधाएं निवेशकों को आकर्षित कर रही हैं। राज्य सरकार ने प्रदेश के विभिन्न अंचलों की विशेषताओं और संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए रीजनल इंडस्ट्री कॉन्क्लेव आयोजित किए हैं। इन आयोजनों से स्थानीय संसाधनों, औद्योगिक संभावनाओं और रोजगार सृजन को नई दिशा मिली है। ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट-2025 में लगभग 30 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे, जिनमें से 30 प्रतिशत से अधिक प्रस्तावों को धरातल पर उतारा गया है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में निवेश को वास्तविक परियोजनाओं में बदलने के प्रयास निरंतर जारी हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रदेश में औद्योगिक विकास को और गति देने के लिए जबलपुर, भोपाल और इंदौर क्षेत्र को मिलाकर नया इंडस्ट्रियल कॉरिडोर बनाया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि प्रदेश के सभी क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधनों का बेहतर उपयोग हो और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अधिक अवसर सृजित हों। खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों के विस्तार से किसानों को उनके उत्पादों का बेहतर मूल्य मिलने के साथ ही कृषि उपज के मूल्य संवर्धन, भंडारण, प्रसंस्करण और विपणन को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के 25 वर्ष के सुशासन पूर्ण होने पर सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री मोदी ने गुजरात में विकास का प्रभावी मॉडल प्रस्तुत किया है। मध्यप्रदेश भी अपनी संभावनाओं और संसाधनों के आधार पर विकास के नए प्रतिमान स्थापित कर रहा है। राज्य सरकार युवाओं को रोजगार उपलब्ध कराने, औद्योगिक निवेश बढ़ाने तथा प्रदेश की समृद्धि सुनिश्चित करने के लिए सभी क्षेत्रों में समन्वित प्रयास कर रही है। सोयाबीन और खाद्य तेल उद्योग इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सोयाबीन केवल एक कृषि उपज नहीं, बल्कि किसानों की आय, खाद्य तेल उद्योग और प्रोटीन आधारित पोषण व्यवस्था से जुड़ा महत्वपूर्ण क्षेत्र है। सोया उद्योग में आधुनिक तकनीक, बेहतर प्रसंस्करण, गुणवत्ता, उत्पाद विविधीकरण और बाजार विस्तार पर ध्यान देकर भारत को खाद्य तेल के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। इस प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय आयोजन कृषि वैज्ञानिकों, किसानों, नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के बीच संवाद एवं सहयोग को मजबूत करते हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में सोपा चेयरमैन श्री नरेश गोयनका ने स्वागत भाषण दिया। उन्होंने मध्यप्रदेश को सोयाबीन उत्पादन का प्रमुख केंद्र बताते हुए कहा कि राज्य सरकार किसानों के हित में महत्वपूर्ण निर्णय ले रही है। भावांतर योजना के माध्यम से किसानों को उनकी उपज के मूल्य में अंतर की राशि उपलब्ध कराने की पहल किसानों के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार उद्योगों के विकास और किसानों के हितों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। सोया उद्योग के विकास के लिए सरकार के मार्गदर्शन और सहयोग से भविष्य में भी नए अवसर सृजित होंगे।
सोयाबीन प्रोसेसर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सोपा) द्वारा आयोजित इस दो दिवसीय अंतर्राष्ट्रीय कॉन्क्लेव का मुख्य विषय “आत्मनिर्भर भारत – पॉवरिंग द ऑयल एंड प्रोटीन विजन” है। कार्यक्रम में देश-विदेश के 500 से अधिक प्रतिनिधि, नीति निर्माता, कृषि वैज्ञानिक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि और प्रगतिशील किसान शामिल हुए। कॉन्क्लेव का उद्देश्य भारतीय खाद्य तेल एवं सोयाबीन क्षेत्र के भविष्य की दिशा तय करना, घरेलू उत्पादन को बढ़ावा देना और वैश्विक बाजार में भारत की स्थिति को मजबूत करना है।
जल संसाधन मंत्री श्री तुलसीराम सिलावट, महापौर श्री पुष्यमित्र भार्गव, श्री सुमित मिश्रा, डिप्टी चेयरमैन श्री गिरीश मतलानी, श्री डेविश जैन, श्री कृष्णवीर, श्री विजय पाल सहित सोयाबीन उद्योग, कृषि और व्यापार जगत से जुड़े अनेक प्रतिनिधि उपस्थित थे।
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राज्य सरकार ओबीसी हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल :मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से आज शुक्रवार को प्रात: ओबीसी महासभा के प्रतिनिधि मंडलों ने मुख्यमंत्री निवास स्थित समत्व भवन में भेंट की। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा है कि प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का विषय अत्यंत महत्वपूर्ण है। राज्य सरकार ओबीसी हितों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। न्याय संगत और तार्किक व्यवस्था के लिए सभी प्रयास किए जा रहे हैं। इसी उद्देश्य से ओबीसी आरक्षण के विषय पर सर्वदलीय बैठक आयोजित की गई और ओबीसी के सभी संगठनों से वार्ता कर मजबूती के साथ उच्च न्यायालय में अपना पक्ष रखा गया था।
राज्य सरकार इस विषय को टालने की दृष्टि से नहीं अपितु उसका समुचित हल निकालने के उद्देश्य से कार्य कर रही है। अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण पर राज्य सरकार की नीति और नीयत स्पष्ट है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बताया कि ओबीसी आरक्षण के संबंध में उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए फैसले का बिंदुवार अध्ययन कर सर्वोच्च न्यायालय के सम्मुख राज्य सरकार की ओर से मजबूती से अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए जा चुके हैं। इस क्रम में आज सायं महाधिवक्ता कार्यालय मध्यप्रदेश द्वारा सर्वोच्च न्यायालय में एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन), स्टेट ऑफ एम.पी. वर्सेस आशिता दुबे एवं अन्य दायर कर दी गई है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव को प्रतिनिधि मंडलों ने म.प्र. में ओबीसी के 27 प्रतिशत आरक्षण पर उच्च न्यायालय के 9 अक्टूबर 2026 के निर्णय के संबंध में अद्यतन आंकड़ों के आधार पर संवैधानिक समाधान करने तथा ओबीसी अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा के संबंध में ज्ञापन सौंपा। मुख्यमंत्री डॉ. यादव से ओबीसी महासभा दिल्ली ने एडवोकेट श्री वैभव सिंह, इंजीनियर श्री महेंद्र सिंह लोधी के नेतृत्व में तथा ओबीसी महासभा ग्वालियर ने महासभा के संस्थापक श्री विजय कुमार, प्रदेश प्रभारी श्री जीतू लोधी और प्रदेशाध्यक्ष श्री गिरिराज धाकड़ के नेतृत्व में अपने-अपने पक्ष रखे।